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मंत्र

मंत्र

मुंशी प्रेमचंद

29 min
5,724 words
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मंत्र मुंशी प्रेमचंद की एक मार्मिक और विचारोत्तेजक कहानी है जो वर्ग-भेद, मानवता और कर्म के फल को दर्शाती है। कहानी में डॉक्टर चड्ढा एक प्रसिद्ध और धनी चिकित्सक हैं। एक रात एक गरीब बूढ़ा व्यक्ति अपने बीमार बेटे को लेकर उनके पास आता है, लेकिन डॉक्टर साहब अपनी नींद और आराम को प्राथमिकता देकर उसे टालते रहते हैं। इलाज न मिल पाने के कारण गरीब का बेटा मर जाता है।

वर्षों बाद जब डॉक्टर चड्ढा के अपने बेटे को साँप काट लेता है और कोई इलाज काम नहीं आता, तो वही बूढ़ा व्यक्ति — जो अब एक सपेरा है — अपने मंत्र से डॉक्टर के बेटे की जान बचाता है। वह बूढ़ा उस रात को याद करता है जब उसका बेटा मरा था, लेकिन बदला लेने की जगह वह क्षमा और मानवता का रास्ता चुनता है।

प्रेमचंद ने इस कहानी में असली 'मंत्र' की परिभाषा दी है — सच्चा मंत्र तांत्रिक विद्या नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और क्षमा है। यह कहानी सामाजिक विषमता और अमीर-गरीब के बीच की खाई पर एक तीखी टिप्पणी है जो आज भी प्रासंगिक है।

कथा साहित्यहिंदी साहित्यलघु कहानीसामाजिक यथार्थवादग्रामीण जीवनअंधविश्वाससामाजिक सुधारभारतीय समाज20वीं सदीप्रेमचंद साहित्यमानव मनोविज्ञानपरंपरा और आधुनिकताप्रगतिशील साहित्य
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
munshi-premchand-all-stories

Books by मुंशी प्रेमचंद

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