पाँच फूल

पाँच फूल

मुंशी प्रेमचंद

1h 46m
21,122 words
hi

1929 में प्रकाशित यह संग्रह प्रेमचंद के लेखकीय जीवन का एक मध्य-बिन्दु है — जब उनकी कलम ने यथार्थवाद और मानवीय करुणा का वह सन्तुलन साध लिया था जो आगे चलकर उन्हें 'उपन्यास-सम्राट्' बनाने वाला था। पाँचों कहानियाँ अलग-अलग सामाजिक धरातलों पर खड़ी हैं, मगर सब में एक ही प्रश्न मौजूद है — मनुष्य की असली पहचान क्या है? पद, धन, धर्म, या वह क्षण जब वह अपने स्वार्थ से ऊपर उठ जाता है?

'मंत्र' — जो हिन्दी की सबसे प्रसिद्ध कहानियों में गिनी जाती है — एक अहंकारी डॉक्टर और एक ग़रीब पिता की दर्दनाक मुलाक़ात है, जहाँ बेटे की मौत और उसकी सज्जनता मिलकर एक ऐसी सीख देती है जिसे जीवन-पर्यन्त भुलाया नहीं जा सकता। 'जिहाद' साम्प्रदायिक उन्माद के बीच मानवीयता का दुर्लभ चित्र है। 'इस्तीफ़ा' एक मामूली क्लर्क के स्वाभिमान की कथा है — जब हिन्दी विद्वानों ने इसे प्रकाशन के समय 'इधर की सभी कहानियों से श्रेष्ठ' कहा था। 'कप्तान-साहब' और 'फ़ातिहा' पारिवारिक त्रासदी और मित्रता की कहानियाँ हैं जो कम जानी जाती हैं पर उतनी ही मार्मिक हैं।

यह संग्रह प्रेमचंद की उस शैली का प्रमाण है जिसे आगे चलकर 'मानसरोवर' की कहानियों ने और निखारा। यहाँ ग्रामीण जीवन की सादगी है, शहरी मध्यवर्ग की उहापोह है, और हिन्दू-मुसलमान संबंधों पर वह संतुलित दृष्टि है जिसके लिए वे जाने जाते हैं।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो प्रेमचंद को सिर्फ 'गोदान' या 'ईदगाह' तक सीमित नहीं रखना चाहते — और जो हिन्दी कथा साहित्य के उस दौर को महसूस करना चाहते हैं जब साहित्य समाज को बदलने का उपकरण था।

LanguageHindi