गल्प समुच्चय

गल्प समुच्चय

मुंशी प्रेमचंद, विविध

4h 54m
58,738 words
hi

'गल्प-समुच्चय' हिन्दी कहानी विधा के स्वर्ण युग का एक अनूठा संकलन है, जिसका संपादन स्वयं मुंशी प्रेमचन्द ने किया है। १९३१ में सरस्वती-प्रेस, बनारस से प्रकाशित इस संग्रह का मुख्य उद्देश्य पाठकों को हिन्दी के विशिष्ट कहानीकारों की 'सर्वोत्तम गल्पों' से परिचित कराना था। प्रेमचन्द ने इसकी भूमिका में 'गल्प' (कहानी) को परिभाषित करते हुए उसे एक 'गमले' के समान बताया है, जहाँ एक ही पौधे का माधुर्य अपने पूर्ण रूप में विकसित होता है। यह संकलन हिन्दी गल्प-कला की शैशवावस्था से प्रौढ़ता की ओर यात्रा का जीवंत प्रमाण है।

इस संग्रह में प्रेमचन्द के अतिरिक्त पण्डित ज्वालादत्त शर्मा, सुदर्शन, चतुरसेन शास्त्री, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक' और शिवपूजन सहाय जैसे दिग्गज साहित्यकारों की रचनाएँ शामिल हैं। इसमें 'शतरंज के खिलाड़ी', 'रानी सारन्धा' और 'ताई' जैसी कालजयी कहानियाँ संकलित हैं, जो सामाजिक यथार्थ, मानवीय मनोविज्ञान और राष्ट्रीय चेतना को स्वर देती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से यह संकलन शोधार्थियों और हिन्दी प्रेमियों के लिए एक अमूल्य निधि है, जो छायावादोत्तर काल की कथा-संवेदना को समझने का एक प्रामाणिक आधार प्रदान करती है।

PublisherKafka
LanguageHindi