
ईदगाह
ईदगाह मुंशी प्रेमचंद की एक कालजयी लघु कहानी है जो चार-पाँच वर्ष के एक गरीब अनाथ बालक हामिद की मार्मिक कहानी प्रस्तुत करती है। कहानी ईद के दिन से शुरू होती है जब हामिद अपनी बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता है। ईद के मेले में जाने के लिए गाँव के सभी बच्चे उत्साहित हैं और उनके पास खर्च करने के लिए पैसे हैं, लेकिन हामिद के पास केवल तीन पैसे हैं। मेले में जहाँ अन्य बच्चे खिलौने, मिठाइयाँ और मनोरंजन की चीजें खरीदते हैं, वहीं हामिद अपने तीन पैसों से एक चिमटा खरीदता है क्योंकि वह देखता है कि उसकी दादी रोटी बनाते समय अपने हाथ जला लेती है।
यह कहानी बाल मनोविज्ञान, निर्धनता, त्याग और निःस्वार्थ प्रेम की अद्भुत प्रस्तुति है। हामिद का चरित्र बचपन की मासूमियत और परिपक्वता का अनूठा मिश्रण है - वह अपनी गरीबी को समझता है लेकिन अपनी दादी के प्रति उसका प्रेम और चिंता उसकी सभी बाल-सुलभ इच्छाओं से ऊपर है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से समाज की आर्थिक विषमता, बच्चों की संवेदनशीलता और पारिवारिक रिश्तों की गहराई को बेहद सरल और मार्मिक भाषा में चित्रित किया है। यह कहानी हिंदी साहित्य में बाल कहानियों की श्रेष्ठ कृतियों में गिनी जाती है और इसका महत्व इस बात में है कि यह दिखाती है कि सच्चा प्रेम और त्याग किसी भौतिक उपहार से कहीं अधिक मूल्यवान होता है। प्रेमचंद की यह रचना आज भी पाठकों के हृदय को छूती है और भारतीय साहित्य की एक अमूल्य धरोहर मानी जाती है।


































