कर्मभूमि

कर्मभूमि

10h 55m
130,946 words
hi

काशी के क्वींस कॉलेज में मार्शल-लॉ जैसा कठोर अनुशासन है। यहाँ तय तारीख पर फीस न चुकाने वाले छात्रों पर जुर्माना लगाया जाता है या उनका नाम रजिस्टर से काट दिया जाता है। इसी शहर का युवक अमरकांत इस धन-लोलुप और संवेदनहीन व्यवस्था से विद्रोह करता है। पैसे के लिए आत्मा बेच देने वाले इस समाज से अलग होकर, वह अपनी पत्नी सुखदा को शहर में छोड़ता है और किसानों के बीच काम करने के लिए ग्रामीण भारत की ओर निकल पड़ता है।

गाँव में लगान और आर्थिक शोषण के खिलाफ एक बड़ा किसान आंदोलन खड़ा होता है, जबकि शहर में सुखदा जातिवाद, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध राष्ट्रीय मोर्चे का नेतृत्व सँभालती है। दोनों जगहों पर ब्रिटिश सत्ता और भारतीय समाज की अपनी रूढ़ियों के साथ सीधा टकराव जन्म लेता है।

१९३२ में प्रकाशित यह रचना प्रेमचंद के आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का प्रमुख हिस्सा है। यह बीसवीं सदी के स्वतंत्रता संग्राम, शिक्षा व्यवस्था और जातिगत संघर्षों को उनके वास्तविक स्वरूप में दर्ज़ करती है।

LanguageHindi