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विचार: प्रेमचंद

विचार: प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद

3h 26m
41,032 words
hi
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'विचार: प्रेमचंद' कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद के चिंतनशील व्यक्तित्व और उनकी साहित्यिक मान्यताओं को प्रकट करने वाला एक महत्वपूर्ण संकलन है। इस पुस्तक में 'साहित्य का उद्देश्य', 'कहानी-कला' और 'उपन्यास' जैसे निबंध जहाँ साहित्य को केवल मनोरंजन न मानकर उसे जीवन और समाज के सुधार का सशक्त माध्यम मानने की उनकी प्रगतिशील दृष्टि को स्थापित करते हैं, वहीं 'उर्दू, हिन्दी और हिन्दुस्तानी' तथा 'राष्ट्र-भाषा हिन्दी और उसकी समस्याएँ' जैसे लेखों के माध्यम से उन्होंने भाषा-विवाद पर अपनी स्पष्ट, निष्पक्ष और समन्वयवादी सोच प्रस्तुत की है। यह कृति पाठकों को प्रेमचंद की रचना-प्रक्रिया और तत्कालीन भाषाई एवं सामाजिक सरोकारों से गहरा परिचय कराती है।

Hindi LiteratureHindi CriticismPremchandLanguage PoliticsHindi Classics
PublisherStandard Ebooks
LanguageHindi
Source
Internet ArchiveProject Gutenberg
CopyrightThe source text and artwork in this ebook are believed to be in the United States public domain; that is, they are believed to be free of copyright restrictions in the United States. They may still be copyrighted in other countries, so users located outside of the United States must check their local laws before using this ebook. The creators of, and contributors to, this ebook dedicate their contributions to the worldwide public domain via the terms in the [CC0 1.0 Universal Public Domain Dedication](https://creativecommons.org/publicdomain/zero/1.0/).

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