अंगारे

अंगारे

सज्जाद ज़हीर, रशीद जहाँ, महमूदुज़्ज़फ़र, अहमद अली

1h 9m
13,789 words
hi

1932 में लखनऊ से प्रकाशित अंगारे आधुनिक उर्दू कहानी का नुक़्ता-ए-आग़ाज़ मानी जाती है। सज्जाद ज़हीर, रशीद जहाँ, महमूदुज़्ज़फ़र और अहमद अली — इन चार नौजवान लेखकों ने इस संग्रह में सामाजिक विषमता, धार्मिक पाखंड, ग़रीबी और स्त्री शोषण जैसे अपरंपरागत विषयों को इतनी बेबाकी से उठाया कि ब्रिटिश सरकार ने इसे अश्लील, अनैतिक और धर्म-विरोधी घोषित कर ज़ब्त कर लिया। यह किताब प्रगतिशील लेखक आंदोलन की नींव बनी।

LanguageHindi
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