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फंदा

फंदा

आचार्य चतुरसेन शास्त्री

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3,575 words
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“फंदा” आचार्य चतुरसेन शास्त्री की एक तीखी सामाजिक कहानी है, जिसकी पृष्ठभूमि सन् 1917 के दिल्ली के दरीबा-मुहल्ले की भयंकर सर्दी और गहरी ग़रीबी है। एक अँधेरे और गंदे मकान में बैठी एक माँ अपने सूखे स्तनों से अधमरे बच्चे को दूध पिलाने का असफल प्रयत्न कर रही है, और कुछ ही हाथ की दूरी पर एक तीन साल की बालिका भूख से तड़प रही है। कहानी इसी दृश्य से शुरू होकर भूख, सतीत्व, ममता और समाज के अदृश्य फंदों के बीच एक स्त्री की त्रासद यात्रा तक पहुँचती है। मूल पाठ हिंदीसमय (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय) से लिया गया है।

हिन्दी साहित्यहिन्दी कहानीकहानीगद्यसामाजिक कहानीग़रीबीबीसवीं सदीस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्यदिल्ली
LanguageHindi
Source
हिंदीसमय (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय)

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