
मंटो ने बम्बई में कई साल गुज़ारे और फ़िल्म इंडस्ट्री में काम किया। इस शहर ने उनकी लेखनी को गहराई दी। इस संग्रह में 15 कहानियाँ हैं जो बम्बई की चकाचौंध, फ़िल्मी दुनिया, सड़क छाप ज़िन्दगी और महानगर की तन्हाई को बयान करती हैं। बम्बई मंटो के लिए इंसानी फ़ितरत का सबसे बड़ा थिएटर था।