Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. अतिथि
अतिथि

अतिथि

रवीन्द्रनाथ ठाकुर

33 min
6,411 words
hi
Start Reading

एक साधारण गृहस्थ जीवन में अचानक एक अपरिचित अतिथि का आगमन होता है। यह अतिथि न केवल घर की दहलीज़ पर दस्तक देता है, बल्कि उन सभी मान्यताओं और परंपराओं को भी चुनौती देता है जिन पर एक परिवार की नींव टिकी होती है। मेज़बान और अतिथि के बीच का यह संबंध धीरे-धीरे एक जटिल भावनात्मक द्वंद्व में बदलता जाता है, जहाँ सामाजिक कर्तव्य, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आतिथ्य की परंपरागत अवधारणाएँ आपस में टकराती हैं।

ठाकुर की कथा अत्यंत सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि से भरी हुई है। वे उन अनकहे तनावों को उजागर करते हैं जो तब उत्पन्न होते हैं जब एक व्यक्ति की उपस्थिति किसी दूसरे के जीवन में अनपेक्षित रूप से घुसपैठ करती है। कहानी का स्वर शांत और संयमित है, फिर भी प्रत्येक वाक्य में एक गहरी बेचैनी व्याप्त है। यह केवल आतिथ्य की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस असुविधा की कहानी है जो तब पैदा होती है जब हमारी नैतिक ज़िम्मेदारियाँ हमारी निजी इच्छाओं से भिड़ जाती हैं।

यह कृति उन पाठकों के लिए है जो मानवीय संबंधों की सूक्ष्म परतों को समझना चाहते हैं और जो साधारण स्थितियों में छिपे असाधारण नैतिक प्रश्नों की तलाश करते हैं। ठाकुर की भाषा सरल है, पर उनका कथानक उन अनकहे सत्यों को छूता है जिन्हें हम अक्सर स्वीकार करने से कतराते हैं।

कथा संग्रहबंगाली साहित्यभारतीय साहित्यउन्नीसवीं सदीबंगाल पुनर्जागरणमानवीय संवेदनास्त्री विमर्शदार्शनिक कहानियाँरोमांटिक साहित्यसामाजिक सुधारनोबेल पुरस्कार विजेताक्लासिक साहित्यहिंदी अनुवादTagoreटैगोर
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
tagore-hindi-stories

Books by रवीन्द्रनाथ ठाकुर

विदाविदा
स्वदेशस्वदेश
काबुलीवालाकाबुलीवाला
जीवित और मृतजीवित और मृत
पोस्टमास्टरपोस्टमास्टर
भिखारिनभिखारिन
पाषाणीपाषाणी
दृष्टि दानदृष्टि दान
अपरिचिताअपरिचिता
पत्नी का पत्रपत्नी का पत्र
सीमान्तसीमान्त
गुप्त धनगुप्त धन
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँरवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँ

Similar books

प्रवासीलाल वर्मा के नाम पत्रप्रवासीलाल वर्मा के नाम पत्र
कलम, तलवार और त्यागकलम, तलवार और त्याग
न्यायन्याय
हड़तालहड़ताल
पाँच फूलपाँच फूल
चाँदी की डिबियाचाँदी की डिबिया
अंगारेअंगारे
दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनीदुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी
फंदाफंदा
शब्दशब्द
चुने हुए निबंधचुने हुए निबंध
प्रतिज्ञाप्रतिज्ञा
गबनगबन
क्या पाकिस्तान बनना चाहिएक्या पाकिस्तान बनना चाहिए
परिणीतापरिणीता
मरहूम की याद मेंमरहूम की याद में
मैं एक मियाँ हूँमैं एक मियाँ हूँ
नमक का दरोग़ानमक का दरोग़ा
कविताएँकविताएँ
GoraGora
जातिभेद का उच्छेदजातिभेद का उच्छेद