
सन् 1732 के इंग्लैंड में, एक पादरी का पोता वारेन हेस्टिंग्स अपने दादा के पास पल रहा है। माँ की मृत्यु हो चुकी है और पिता उसे छोड़कर वेस्ट-इंडीज़ जा चुके हैं। एक तरफ दादा उसे परिवार के खोए हुए धन और गौरव की गाथाएँ सुनाते हैं, दूसरी तरफ लंदन का तत्कालीन समाज है—जहाँ जुआखानों के बाहर तख्तियाँ टंगी हैं जिन पर एक पेंस में शराब और मुफ्त चटाई का विज्ञापन है। छिन चुकी प्रतिष्ठा और गरीबी के इस माहौल में एक कुशाग्र बालक बड़ा हो रहा है।
यही बालक आगे चलकर भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना करता है। इंग्लैंड की सड़कों और सामाजिक पतन से निकलकर हेस्टिंग्स की महत्वाकांक्षा उसे भारत के राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों के बीच ला खड़ा करती है।
बीसवीं सदी में प्रकाशित चतुरसेन शास्त्री का यह उपन्यास औपनिवेशिक सत्ता के शुरुआती दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह आधुनिक हिंदी साहित्य में ऐतिहासिक तथ्यों और राजनीतिक यथार्थ को कथा का रूप देने का एक स्पष्ट दस्तावेज़ है।