
हिंद स्वराज
Translated by अमृतलाल ठाकोरदास नाणावटी
2h 52m
34,228 words
hi
5.0
दक्षिण अफ़्रीका से लंदन होते हुए लौटते समय 'किलडोनन कैसल' जहाज़ पर गांधीजी ने दस दिनों में यह पुस्तक गुजराती में लिखी थी। क्रांतिकारी भारतीय युवाओं के साथ हुए संवाद के आधार पर यह पाठक और संपादक के बीच की एक काल्पनिक बातचीत के रूप में रचित है। इसमें गांधीजी ने रेल, अदालतें, डॉक्टर, वकील, मशीनें और आधुनिक शिक्षा — पश्चिमी सभ्यता के इन सभी स्तंभों की कड़ी आलोचना की है, और सत्याग्रह तथा आत्मबल के माध्यम से स्वराज प्राप्त करने का मार्ग दिखाया है। यह संस्करण अमृतलाल ठाकोरदास नाणावटी का हिंदी अनुवाद है, जिसमें सात प्रस्तावनाएँ और एक परिशिष्ट शामिल हैं। बंबई सरकार ने प्रकाशन के तुरंत बाद इसे ज़ब्त कर लिया था।
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LanguageHindi
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