
मानसरोवर भाग-8
8h 4m
96,743 words
hi
मानसरोवर का यह अंतिम भाग प्रेमचंद की कहानी-यात्रा के विविध पड़ावों का प्रतिनिधित्व करता है। 'नमक का दारोगा' में ईमानदारी की अंतिम विजय, 'बूढ़ी काकी' में बुढ़ापे और उपेक्षा की मार्मिक कथा, 'हार की जीत' में बाबा भारती की सहनशीलता का पाठ, 'सौत' जैसी स्त्री-केंद्रित कहानियाँ। इकतीस कहानियों का यह संग्रह प्रेमचंद की कलम की गहराई, विविधता और करुणा का अंतिम-किंतु-समान-शक्तिशाली प्रमाण है।
कथा साहित्यहिन्दी कहानीहिन्दी साहित्यप्रेमचंदग्रामीण जीवनसामाजिक यथार्थजातिवादस्त्री विमर्शस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्यमानसरोवरआदर्शोन्मुख यथार्थवाद
LanguageHindi









































