
मानसरोवर श्रृंखला का यह दूसरा भाग प्रेमचंद के अंतिम वर्षों की उन कहानियों का संग्रह है जिनमें उनकी सामाजिक चिंता और कलात्मक परिपक्वता अपने चरम पर हैं। 'दो बैलों की कथा' में पशुओं के माध्यम से दिखाई गई मित्रता और मुक्ति की आकांक्षा, 'दूध का दाम' में अछूत माँ और सवर्ण शिशु का करुण संबंध, और 'मिस पद्मा' जैसी आधुनिक नारी-चरित्रों पर केंद्रित कहानियाँ इस भाग की विशिष्टता हैं। बाईस कहानियों का यह संग्रह प्रेमचंद के गहन सामाजिक यथार्थवाद का प्रतिनिधि है।