
‘उसने कहा था’ (सरस्वती, 1915) हिन्दी की पहली आधुनिक कहानी मानी जाती है — अमृतसर के बाज़ार में पनपा बालपन का प्रेम, पच्चीस वर्ष बाद फ्रांस की खंदकों में एक वचन बनकर लौटता है। कहा जाता है कि गुलेरी ने केवल तीन कहानियाँ लिखकर अमरता पा ली, पर उनकी लेखनी यहीं नहीं रुकी — इस संग्रह में ‘सुखमय जीवन’ और ‘बुद्धू का काँटा’ के साथ उनकी वे बीस से अधिक लघु कथाएँ भी हैं जिनमें पंडिताऊ आडम्बर, धर्म के ठेकेदारों और समाज की रूढ़ियों पर उनका चिर-परिचित व्यंग्य चमकता है। संस्कृत, प्राकृत और पंजाबी लोक-जीवन में रचे-बसे इस विलक्षण विद्वान की भाषा में हास्य और करुणा एक साथ चलते हैं। गुलेरी (1883–1922) की समस्त कथा-सम्पदा पहली बार एक जगह।