Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. सुखमय जीवन
सुखमय जीवन

सुखमय जीवन

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

15 min
2,924 words
hi
Start Reading

भारत मित्र (1911) में छपी यह कहानी हिन्दी के आरम्भिक हास्य की सबसे चमकदार मिसालों में है। परीक्षा देकर लौटता कथावाचक राह में आम के बगीचे का लोभ नहीं छोड़ पाता और वहीं एक बूढ़े सज्जन की नज़र में ‘सुयोग्य वर’ बन बैठता है। ‘सुखमय जीवन’ नामक पोथी, कमला की माँ की सच्चाई और एक अप्रत्याशित सगाई — तीन खण्डों में बँटी यह कथा गुलेरी की उस दुर्लभ प्रतिभा की गवाह है जो व्यंग्य को आत्म-परिहास में घोलकर परोसती है।

कहानी संग्रहहिंदी साहित्यहास्य-व्यंग्यविवाहयुवा जीवनस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्यहिन्दी की अमर कहानियाँ
LanguageHindi
Source
उसने कहा था और अन्य कहानियाँ (राजपाल एण्ड सन्ज़, 2014)

Books by चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

कहानियाँकहानियाँ
उसने कहा थाउसने कहा था
बुद्धू का काँटाबुद्धू का काँटा
घंटाघरघंटाघर
हीरे का हीराहीरे का हीरा

Similar books

देवीदेवी
दृष्टि दानदृष्टि दान
दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनीदुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी
हार की जीतहार की जीत
हिंद स्वराजहिंद स्वराज
हिंदुत्व का दर्शनहिंदुत्व का दर्शन
ईदगाहईदगाह
काबुलीवालाकाबुलीवाला
कलम, तलवार और त्यागकलम, तलवार और त्याग
कंकालकंकाल
कृष्ण और उनकी गीताकृष्ण और उनकी गीता
जीवित और मृतजीवित और मृत
आग और धुआँआग और धुआँ
अँधेरे मेंअँधेरे में
अतिथिअतिथि
चुने हुए निबंधचुने हुए निबंध
दो वृद्ध पुरुषदो वृद्ध पुरुष
विपात्रविपात्र