प्रेमचंद
‘पूस की रात’ भारतीय किसान की विवशता की सबसे मार्मिक तस्वीरों में से एक है। ठिठुरती रात, कर्ज़ का बोझ और मेहनत के बावजूद हाथ न आती राहत — प्रेमचंद इसे बिना किसी नारे के, सिर्फ़ हलकू और जबरा के ज़रिए कह जाते हैं। अदबी दुनिया की आवाज़ में।
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पूस की रात