
मानसरोवर का यह भाग प्रेमचंद की ऐतिहासिक, रोमांटिक और पौराणिक कहानियों का संग्रह है जो उनके शुरुआती लेखन-काल से भी चुनी गई हैं। बुंदेलखंड की रानी सारंधा की वीरता, ओरछा के राजा हरदौल की त्याग-कथा, मुग़ल-राजपूत संघर्ष की पृष्ठभूमि में रचित कहानियाँ इस भाग की विशेषता हैं। 'त्यागी का प्रेम', 'शाप', 'मृत्यु के पीछे' जैसी रचनाएँ प्रेमचंद की कहानी-कला के कम चर्चित लेकिन समृद्ध पक्ष को दर्शाती हैं। बीस कहानियों का यह संग्रह इतिहास, वीरगाथा और दार्शनिक चिंतन का अनूठा मिश्रण है।