
प्रेमचंद की सबसे प्रिय कहानियों में से एक, ‘ईदगाह’ बूढ़ी दादी अमीना और उसके नन्हे पोते हामिद के इर्द-गिर्द बुनी गई है। मेले की रौनक, बच्चों की मासूम ख़्वाहिशें और एक बच्चे के भीतर छिपी असमय परिपक्वता — यह कहानी बिना उपदेश दिए आँखें नम कर देती है। अदबी दुनिया की आवाज़ में प्रस्तुत।