
यह भाग प्रेमचंद की उन कहानियों का संकलन है जो पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आंदोलन को केंद्र में रखती हैं। 'पंच परमेश्वर' में पंचायत के माध्यम से सत्य की विजय, 'बड़े घर की बेटी' में स्त्री-सम्मान की प्रतिष्ठा, 'जेल', 'जुलूस', 'समर यात्रा' जैसी कहानियों में स्वतंत्रता-संग्राम की लौ। तेईस कहानियों का यह संग्रह प्रेमचंद के राष्ट्रीय-सामाजिक सरोकारों का दस्तावेज़ है।