
मानसरोवर का यह चौथा भाग जातिगत अन्याय, सूदखोर व्यवस्था, और पाखंडी धर्मानुष्ठान पर प्रेमचंद के सबसे तीखे प्रहारों का संग्रह है। 'सद्गति' में दुखी चमार की मृत्यु के माध्यम से पंडितों का पाखंड, 'सवा सेर गेहूँ' में सूद के दुष्चक्र में फँसे किसान की त्रासदी, 'सभ्यता का रहस्य' में आधुनिक सभ्यता की चीरफाड़ — ये रचनाएँ प्रेमचंद के क्रांतिकारी तेवर का प्रमाण हैं। अठारह कहानियों का यह संग्रह उनके सबसे सशक्त सामाजिक लेखन में गिना जाता है।