
मानसरोवर प्रेमचंद की लगभग तीन सौ कहानियों का आठ भागों में संकलन है, जिसका पहला भाग उनके जीवन-काल में 1936 में प्रकाशित हुआ था। इस भाग में ग्रामीण भारत, बाल-मन, जातिगत विषमता, और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर लिखी गई छब्बीस कहानियाँ शामिल हैं। हामिद और उसका चिमटा, हलकू और जबरा की पूस की रात, होरी-धनिया की भूमिहीनता, और निःशुल्क सेवा का सौंदर्य — ये छवियाँ हिंदी पाठक के मन में सदा के लिए बस चुकी हैं। प्रेमचंद की यह व्यवस्थित प्रस्तुति उनकी कहानीकला के विकास और विविधता का सर्वश्रेष्ठ प्रमाण है।