शीशा घाट

शीशा घाट

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नैयर मसूद (1936–2017) लखनऊ के उर्दू अफ़साने के सबसे रहस्यमय और नफ़ीस उस्तादों में से एक थे। फ़ारसी के विद्वान और मुतर्जिम, उनके अफ़साने ख़्वाब और हक़ीक़त की सरहद पर बुने जाते हैं — जहाँ हर मामूली चीज़ किसी अनकहे राज़ की तरफ़ इशारा करती है। उनकी कहानियों को अक्सर काफ़्का से जोड़ा जाता है, और 2007 में उन्हें 'ताऊस चमन की मैना' पर सरस्वती सम्मान मिला।

'शीशा घाट' उनकी सबसे ज़्यादा तर्जुमा और सराही गई कहानी है — पानी के किनारे बसी एक ऐसी दुनिया की दास्तान, जहाँ ख़ामोशी ख़ुद एक ज़बान बन जाती है। यह अदबी दुनिया चैनल की आवाज़ में, तसनीफ़ हैदर की वाचिकी में यहाँ मौजूद है।

Publisheradbi-duniya
LanguageHindi, Urdu