दिल्ली की आख़िरी शमा

दिल्ली की आख़िरी शमा

मिर्ज़ा फ़रहतुल्लाह बेग

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दिल्ली की आख़िरी शमा उर्दू साहित्य की एक महत्वपूर्ण और अत्यंत लोकप्रिय रचना है, जिसे मिर्ज़ा फ़रहतुल्लाह बेग ने लिखा। यह लेख 19वीं सदी की दिल्ली के अंतिम बड़े मुशायरे की कल्पनात्मक पुनर्रचना है, जिसमें उस दौर की नज़ाकत, अदबी शिष्टाचार, भाषा की मिठास और सांस्कृतिक जीवन को बड़े जीवंत और रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है।

लेख में ग़ालिब, ज़ौक़ और मोमिन जैसे शायरों के दौर की महफ़िलों का ऐसा चित्र खींचा गया है, मानो पाठक स्वयं उस सभा का हिस्सा हो। साथ ही, इसमें पुराने ज़माने के ढलते वैभव और बदलते समय की एक हल्की उदासी भी महसूस होती है। फ़रहतुल्लाह बेग की शैली में हास्य, व्यंग्य और गहरी सांस्कृतिक समझ का सुंदर संतुलन दिखाई देता है।

यह रचना केवल एक मुशायरे का वर्णन नहीं, बल्कि दिल्ली की खोती हुई तहज़ीब और उर्दू अदब की विरासत का भावपूर्ण दस्तावेज़ है।

Publisheradbi-duniya
LanguageHindi, Urdu