
घुमक्कड़ शास्त्र
महर्षि व्यास ने ब्रह्म की जिज्ञासा को सर्वोच्च माना और जैमिनि ने धर्म को, लेकिन इस दर्शन के अनुसार दुनिया को ब्रह्म, विष्णु या शंकर नहीं, बल्कि घुमक्कड़ धारण करते हैं। यह स्थिरता के खिलाफ एक सीधा विद्रोह है, जहाँ एक जगह टिके रहना मृत्यु है और निरंतर गति ही जीवन।
यहाँ यात्रा कोई शौक नहीं, बल्कि एक शास्त्र है। इसके पन्नों में घर-द्वार के जंजाल को तोड़ने का स्पष्ट आह्वान है; रास्तों पर स्वावलंबन और शिल्प की जरूरत; स्त्री और पिछड़ी जातियों का घुमक्कड़ जीवन; तथा सफर में धर्म, प्रेम और मृत्यु का दर्शन। यह उस आदिम मनुष्य की वृत्ति का समर्थन है, जो खेती और बागबानी से मुक्त होकर आकाश के पक्षियों की तरह पृथ्वी पर विचरण करता था और जिसकी खोजों को आधुनिक समाज ने अपने नाम से भुनाया।
बीसवीं सदी के प्रगतिवादी दौर में राहुल सांकृत्यायन द्वारा लिखी गई यह कृति आधुनिक हिंदी यात्रा-साहित्य का प्रस्थान-बिंदु है। यह केवल भौगोलिक स्थानों का विवरण नहीं, बल्कि घुमक्कड़ी को एक स्वतंत्र दर्शन के रूप में स्थापित करने वाला ग्रंथ है।
























