
चोटी की पकड़
2h 45m
32,847 words
hi
"चोटी की पकड़" सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की एक तीखी व्यंग्यात्मक रचना है, जो भारतीय समाज की परंपरागत मानसिकता और ढकोसलों पर करारा प्रहार करती है। यह कहानी विशेष रूप से जातिवाद, रूढ़िवादिता और सामाजिक दिखावे को केंद्र में रखती है। ‘चोटी’ को प्रतीक बनाकर लेखक यह दर्शाते हैं कि कैसे बाह्य चिन्हों को पकड़कर लोग भीतर की नैतिकता और विवेक को भूल जाते हैं। निराला की लेखनी की खासियत—तेज़ व्यंग्य, सरल भाषा और गहरी सामाजिक चेतना—इस रचना में साफ़ झलकती है। यह कहानी पाठकों को न सिर्फ़ सोचने पर मजबूर करती है, बल्कि उन्हें अपने आसपास की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने की प्रेरणा भी देती है।
हिंदी साहित्यछायावादआधुनिक कालस्वतंत्रता संग्रामप्रगतिवादसामाजिक चेतनामानवतावाद20वीं सदीनिराला जी की कृतिहिंदी काव्यआत्मकथात्मकदर्शनजीवन संघर्ष
PublisherKafka
LanguageHindi
CopyrightThe source text and calculation are believed to be in the public domain.


























