रक्षा बंधन तथा अन्य कहानियाँ

रक्षा बंधन तथा अन्य कहानियाँ

विश्वंभरनाथ शर्मा 'कौशिक'

3h 34m
42,784 words
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'रक्षा बन्धन तथा अन्य कहानियाँ' सुप्रसिद्ध कथाकार श्री विश्वम्भर नाथ शर्मा 'कौशिक' के कथा-शिल्प का एक प्रतिनिधि संग्रह है। इसमें कुल २४ कहानियाँ संकलित हैं, जिनमें 'भक्त की टेर', 'पत्रकार', 'विजय दशमी' और शीर्षक कहानी 'रक्षा-बन्धन' विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। कौशिक जी की कहानियों की मुख्य विशेषता उनका चरित्र-प्रधान होना और कथानक में यथार्थवाद के साथ आदर्शवाद का पुट देना है। वे समाज में व्याप्त बुराइयों, अवसरवाद और मानवीय कमजोरियों पर अपनी लेखनी से प्रहार करते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य सदैव समाज-सुधार और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना ही रहता है।

इस संकलन की कहानियों में तत्कालीन भारत की सामाजिक परिस्थितियों, राजनीतिक चेतना और सामान्य जनजीवन के संघर्षों का सजीव चित्रण मिलता है। लेखक ने 'कम्यूनिस्ट सभा', 'वोटर' और 'अवसरवाद' जैसी कहानियों के माध्यम से समाज के बदलते राजनैतिक और नैतिक ढांचे को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। आगरा के 'विनोद पुस्तक मन्दिर' द्वारा १९५९ में प्रकाशित यह प्रथम संस्करण हिंदी कहानी के विकासक्रम को समझने के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। भाषा की सरलता और संवादों की सजीवता के कारण यह पुस्तक आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अपने प्रकाशन के समय थी।

PublisherKafka
LanguageHindi