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निर्मला

निर्मला

प्रेमचंद

5h 1m
60,193 words
hi
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युवा निर्मला का विवाह एक ऐसे वृद्ध वकील से हो जाता है जो उम्र में उसके पिता के बराबर है, और जिसके घर में पहली पत्नी से हुए तीन बेटे भी हैं। यह विवाह दहेज की मांग पूरी न कर पाने की विवशता का परिणाम है। निर्मला अचानक एक ऐसे घर की मालकिन बन जाती है जहां उसकी अपनी उम्र के बेटे उसे सौतेली मां के रूप में देखते हैं। यह केवल एक असमान विवाह की कहानी नहीं है, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था का गहरा अध्ययन है जो स्त्रियों को परिस्थितियों की शिकार बना देती है।

प्रेमचंद इस उपन्यास में मध्यवर्गीय समाज की नैतिक जटिलताओं को उजागर करते हैं। घर के भीतर पनपती ईर्ष्या, संदेह और गलतफहमियां धीरे-धीरे एक सामान्य परिवार को भीतर से खोखला करती जाती हैं। लेखक की सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक दृष्टि हर पात्र की पीड़ा को समझती है—चाहे वह निर्मला का आंतरिक संघर्ष हो, वृद्ध पति की असुरक्षा हो, या सौतेले बेटों का मानसिक द्वंद्व। दहेज प्रथा की निर्मम आलोचना के साथ-साथ यह कथा स्त्री-पुरुष संबंधों, पारिवारिक मर्यादा और नैतिक दायित्वों के प्रश्न उठाती है।

यह उपन्यास आज भी प्रासंगिक है क्योंकि यह उन सामाजिक बंधनों को रेखांकित करता है जो व्यक्तिगत खुशी को कुचल देते हैं। प्रेमचंद की सहज भाषा और यथार्थवादी शैली पाठक को निर्मला की त्रासदी में इस तरह उलझाती है कि हर निर्णय का नैतिक भार महसूस होने लगता है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो सामाजिक यथार्थ के गहरे विश्लेषण और मानवीय संवेदनाओं की बारीक समझ की तलाश करते हैं।

LanguageHindi
Source
Wikisource

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