
मनुष्य का जीवन आधार क्या है
माधो एक भूमिहीन मोची है, जो एक ही फटे कंबल में अपने परिवार के साथ जाड़े के दिन काट रहा है। सर्दियों के वस्त्र के लिए उसने पेट काटकर तीन रुपये जोड़े हैं। जब गांव वाले उसका पुराना कर्ज चुकाने से मना कर देते हैं और बनिया उसे उधार देने से इनकार कर देता है, तो वह ठंड में खाली हाथ घर की ओर लौटता है। रास्ते में, अंधेरे के बीच एक मंदिर के पास, उसे ज़मीन पर पड़ी एक श्वेत आकृति दिखाई देती है—एक अजनबी, जो उसके जीवन में तीन सवाल लेकर आता है।
इस अजनबी के आने से माधो की झोपड़ी में जीवन, मृत्यु और अस्तित्व से जुड़े तीन बुनियादी सवाल जन्म लेते हैं। इस कहानी संग्रह में 19वीं सदी के रूसी किसान जीवन की दिनचर्या, वैवाहिक जीवन के तनाव और भूख के बीच मनुष्य के नैतिक दायित्वों को दर्ज किया गया है।
लियो टॉलस्टॉय की ये रचनाएं रूसी यथार्थवाद का वह हिस्सा हैं, जहां धर्म और दर्शन सैद्धांतिक बहसों से निकलकर आम लोगों के पसीने और मिट्टी में अपनी जगह बनाते हैं।























