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पिता के पत्र पुत्री के नाम

पिता के पत्र पुत्री के नाम

जवाहरलाल नेहरू

Translated by प्रेमचंद

2h 2m
24,339 words
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इंदिरा दस साल की थीं और मसूरी में थीं, जब इलाहाबाद से उनके पिता ने उन्हें ये पत्र लिखने शुरू किए। धरती कैसे बनी, जानदार चीज़ें कैसे पैदा हुईं, कौमें और जबानें कैसे बनीं, सरगना राजा कैसे हो गया — पूरी दुनिया का इतिहास, एक पिता की कोमलता और एक जन्मजात लेखक की सफाई के साथ। 1929 में प्रकाशित इस पुस्तक का यह हिंदी अनुवाद स्वयं प्रेमचंद ने किया था — हिंदी गद्य के दो शिखरों की यह मुलाक़ात अपने आप में एक धरोहर है।

पत्रइतिहासविश्व इतिहासबाल साहित्यहिन्दी साहित्यक्लासिक साहित्यशिक्षास्वतंत्रता-पूर्व साहित्यअनुवादप्राकृतिक इतिहास
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
Internet ArchiveGadya Kosh
CopyrightPublic domain

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