
Translated by प्रेमचंद
इंदिरा दस साल की थीं और मसूरी में थीं, जब इलाहाबाद से उनके पिता ने उन्हें ये पत्र लिखने शुरू किए। धरती कैसे बनी, जानदार चीज़ें कैसे पैदा हुईं, कौमें और जबानें कैसे बनीं, सरगना राजा कैसे हो गया — पूरी दुनिया का इतिहास, एक पिता की कोमलता और एक जन्मजात लेखक की सफाई के साथ। 1929 में प्रकाशित इस पुस्तक का यह हिंदी अनुवाद स्वयं प्रेमचंद ने किया था — हिंदी गद्य के दो शिखरों की यह मुलाक़ात अपने आप में एक धरोहर है।