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हीरे का हीरा

हीरे का हीरा

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

6 min
1,083 words
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गुलाबदेई ने आँगन गोबर से लीपकर चावल के मण्डन माँड़े हैं, बुढ़िया माता की पथराई आँखें दरवाज़े पर लगी हैं, और सात वर्ष का हीरा पड़ोसियों से कहता फिर रहा है कि मेरा चाचा आवेगा। तीन वर्ष के वियोग, कंगाली और बीमारी के बाद लहनासिंह लौटा है — चेहरे पर घावों के खड्डे, छाती पर चाँदी के तमगे और एक टाँग की जगह चमड़े के तसमों से बँधा डंडा। जिस देश की स्त्रियाँ पत्र लिखना नहीं जानतीं, वहाँ प्रेम आँसुओं की धारा में बहता है — इसी अनकहे प्रेम का चित्र गुलेरी ने इस छोटी-सी कथा में खींचा है।

कहानी संग्रहहिंदी साहित्ययुद्धपंजाबी जीवनग्रामीण जीवनप्रेम कथापरिवारस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्य
LanguageHindi
Source
उसने कहा था और अन्य कहानियाँ (राजपाल एण्ड सन्ज़, 2014)

Books by चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

कहानियाँकहानियाँ
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