वान्का

वान्का

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मॉस्को में एक मोची के यहाँ अप्रेंटिस बनकर आया नौ वर्षीय वान्का क्रिसमस की रात अपने गाँव में रहने वाले दादा को एक चिट्ठी लिखता है, जिसमें अपने दुखों और घर लौटने की तड़प को उँडेल देता है। कुछ ही पन्नों में चेखव बचपन, अकेलेपन और बाल-श्रम की करुणा को अविस्मरणीय बना देते हैं। हिंदी-उर्दू अनुवाद, Adbi Duniya की प्रस्तुति।

PublisherKafka
LanguageHindi