
आनन्द मठ
Translated by ईश्वरीप्रसाद शर्मा
3h 29m
41,695 words
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1882 में प्रकाशित बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का आनन्दमठ भारतीय साहित्य का वह उपन्यास है जिसने इतिहास बदल दिया। अठारहवीं सदी के बंगाल के भीषण अकाल और संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर लिखी यह कथा सन्तान कहलाने वाले उन संन्यासियों की है जिन्होंने मातृभूमि को ही माता मान लिया। इसी उपन्यास के भीतर वन्दे मातरम् गीत पहली बार प्रकट हुआ, जो आगे चलकर पूरे स्वाधीनता संग्राम का महामंत्र बना। यह संस्करण पंडित ईश्वरीप्रसाद शर्मा के 1922 के हिंदी अनुवाद का पाठ प्रस्तुत करता है।
उपन्यासकथा साहित्यबांग्ला साहित्यऐतिहासिक उपन्यासस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्यहिन्दी अनुवादसंन्यासी विद्रोहवन्दे मातरम्देशभक्ति
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
CopyrightPublic domain (author d. 1894; translation published 1922).






















