
रानी शेहरज़ाद को अपनी जान बचानी है। सुल्तान हर रात एक नई स्त्री से विवाह करता है और सुबह होते ही उसका सिर कलम करवा देता है। इस मृत्यु-चक्र को रोकने के लिए शेहरज़ाद एक तरकीब निकालती है—वह सुल्तान को एक कहानी सुनाना शुरू करती है, लेकिन भोर की पहली किरण फूटने पर उसे ठीक उसी जगह अधूरा छोड़ देती है जहाँ कहानी में कोई रहस्य खड़ा होता है। अगली रात का किस्सा सुनने के लिए सुल्तान उसे एक दिन का और जीवन देता है।
यह पुस्तक उन शुरुआती रातों का दस्तावेज़ है, जहाँ कहानियों के भीतर से कहानियाँ निकलती हैं। इन कथाओं में जादुई दुनिया के दृश्य और पात्र सामने आते हैं: चालीस चोरों के खज़ाने वाली गुफा के मुहाने पर खड़ा अलीबाबा; एक पुराने चिराग़ को रगड़कर जिन्न को बुलाता अलादीन; और समंदर के तूफानों से जूझता नाविक सिंदबाद। व्यापारी, जादूगर, खलीफा और फकीर इन रातों में अपना रास्ता खोजते हैं।
इस्लामी स्वर्णिम युग की मौखिक परंपरा से विकसित हुआ यह अरबी लोककथाओं का वह संग्रह है, जिसके ज़रिए ये पारंपरिक कथाएं विश्व साहित्य का हिस्सा बनीं।