Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. पत्नी का पत्र
पत्नी का पत्र

पत्नी का पत्र

रवीन्द्रनाथ ठाकुर

32 min
6,302 words
hi
Start Reading

एक पत्नी अपने पति को पत्र लिखती है—लेकिन यह कोई साधारण पत्र नहीं है। यह एक ऐसी स्त्री की आवाज़ है जो वर्षों तक चुप रही, जिसने समाज और परिवार के नियमों को मानते हुए अपनी इच्छाओं को दबाया, और अब पहली बार अपने मन की बात कहने का साहस जुटा रही है। पति-पत्नी के बीच का वह फासला, जो सामाजिक रूढ़ियों और लैंगिक असमानता से बना है, इस पत्र के केंद्र में है। यह कहानी बंगाली समाज की उस दुनिया से निकलती है जहाँ विवाह संस्था के भीतर भी एक स्त्री अदृश्य और उपेक्षित रह सकती है।

ठाकुर की यह रचना स्त्री-मन के भीतरी संघर्ष को अत्यंत संवेदनशीलता से उकेरती है। पत्र की शैली में लिखी गई यह कहानी एक स्वीकारोक्ति भी है और विद्रोह भी—एक ऐसा विद्रोह जो शांत है, पर गहरा और मर्मस्पर्शी। लेखक ने स्त्री की आत्म-चेतना के जागरण को इतनी बारीकी से प्रस्तुत किया है कि हर वाक्य में दर्द, आत्म-सम्मान और मुक्ति की तड़प दिखाई देती है। कहानी में कोई नाटकीयता नहीं है, बल्कि एक धीमी, स्थिर और भावनात्मक रूप से सघन यात्रा है जो पाठक को भीतर तक छू जाती है।

यह कृति इसलिए कालजयी है क्योंकि यह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने बीसवीं सदी की शुरुआत में ही उन सवालों को उठाया था जो आज भी स्त्रियों के जीवन में गूंजते हैं—स्वाभिमान, पहचान और भावनात्मक उपेक्षा के प्रश्न। यह उन पाठकों के लिए है जो साहित्य में मानवीय रिश्तों की जटिलता और स्त्री-अनुभव की गहराई को समझना चाहते हैं, और जो छोटी किंतु प्रभावशाली रचनाओं की शक्ति को पहचानते हैं।

कथा संग्रहबंगाली साहित्यभारतीय साहित्यउन्नीसवीं सदीबंगाल पुनर्जागरणमानवीय संवेदनास्त्री विमर्शदार्शनिक कहानियाँरोमांटिक साहित्यसामाजिक सुधारनोबेल पुरस्कार विजेताक्लासिक साहित्यहिंदी अनुवादTagoreटैगोर
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
tagore-hindi-stories

Books by रवीन्द्रनाथ ठाकुर

भिखारिनभिखारिन
विदाविदा
पाषाणीपाषाणी
जीवित और मृतजीवित और मृत
पोस्टमास्टरपोस्टमास्टर
काबुलीवालाकाबुलीवाला
अतिथिअतिथि
दृष्टि दानदृष्टि दान
अपरिचिताअपरिचिता
सीमान्तसीमान्त
गुप्त धनगुप्त धन
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँरवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँ

Similar books

गबनगबन
प्रतिज्ञाप्रतिज्ञा
जातिभेद का उच्छेदजातिभेद का उच्छेद
बङे भाई साहबबङे भाई साहब
कपालकुण्डलाकपालकुण्डला
शब्दशब्द
अहिल्याबाई होलकरअहिल्याबाई होलकर
परिणीतापरिणीता
मैं एक मियाँ हूँमैं एक मियाँ हूँ
ग़ज़लियात-ए-यगानाग़ज़लियात-ए-यगाना
हार की जीतहार की जीत
सेवासदनसेवासदन
सफलतासफलता
मरहूम की याद मेंमरहूम की याद में