अलिफ़ लैला

अलिफ़ लैला

अरब लोक कथाएँ

26h 42m
320,326 words
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एक राजा की क्रूरता से जन्मी त्रासदी और विश्वासघात की कहानी से शुरू होता है यह अनूठा संग्रह, जहाँ शहरयार नामक सुल्तान अपनी पहली रानी के विश्वासघात से इतना आहत होता है कि वह प्रतिदिन एक नई युवती से विवाह करने और अगली सुबह उसे मृत्युदंड देने का निर्णय लेता है। इसी भयावह परिस्थिति में शहरज़ाद नामक एक बुद्धिमान और साहसी युवती स्वयं को इस विवाह के लिए प्रस्तुत करती है, और अपने पास केवल एक हथियार है - कहानियों की अद्भुत कला। वह हर रात एक ऐसी कथा सुनाती है जो सुबह होते-होते अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर अधूरी छूट जाती है, जिससे सुल्तान अगली रात की कहानी सुनने के लिए उसे जीवित रखने को विवश हो जाता है।

ये कहानियाँ एक के भीतर एक खुलती हैं, जैसे रहस्यमय पेटियाँ जिनमें से हर एक में नया चमत्कार छिपा हो। यहाँ जादूगर, जिन्न, उड़ने वाले कालीन, और बोलने वाले पक्षी हैं; यहाँ गरीब मछुआरे रातोंरात अमीर बन जाते हैं और राजकुमार भिखारी। बगदाद, बसरा, काहिरा और समरकंद की गलियों से लेकर सुदूर द्वीपों और जादुई महलों तक, ये कथाएँ मानवीय लालसा, चालाकी, प्रेम, विश्वासघात और न्याय के विषयों को छूती हैं। हर कहानी अपने आप में एक संपूर्ण जगत है - कभी रोमांचक साहसिक कथा, कभी नीति की शिक्षा, कभी हास्य से भरपूर और कभी गहन दुःख से सराबोर।

इन लोककथाओं की विशिष्टता उनकी संरचना और विविधता में निहित है। कथाओं का यह जाल इतना जटिल और मोहक है कि पाठक स्वयं को शहरयार की स्थिति में पाता है - हमेशा अगली कहानी सुनने के लिए उत्सुक। यहाँ बुद्धि बल से अधिक शक्तिशाली है, शब्द तलवार से अधिक प्रभावी हैं, और कल्पना वास्तविकता को बदल सकती है।

यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो कहानियों की शक्ति में विश्वास करते हैं, जो रात की अंधेरी गलियों से गुजरकर सुबह के उजाले में पहुँचने की यात्रा का

PublisherKafka
LanguageHindi