पिता के पत्र पुत्री के नाम

पिता के पत्र पुत्री के नाम

2h 1m
24,068 words
hi

जब दस साल की इंदिरा मसूरी में थीं और उनके पिता इलाहाबाद में, तो उनके बीच रोजमर्रा की बातचीत का सिलसिला रुक गया। इस भौगोलिक दूरी को पाटने के लिए एक पिता ने अपनी बेटी को खत लिखने शुरू किए—ताकि उसे केवल उसके अपने देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और उसमें बसने वाली जातियों का हाल बताया जा सके।

इन पत्रों में धरती के लाखों साल पुराने इतिहास, जानवरों की उत्पत्ति और पहले इंसान के जन्म का ब्योरा दर्ज है। इन पन्नों पर खेती की शुरुआत से आए बदलाव, कबीलों के सरगनाओं का राजाओं में बदलना, मिस्र और क्रीट के प्राचीन शहर, समुद्री व्यापार और हिंदुस्तान में आर्यों के आगमन जैसी घटनाएं सिलसिलेवार तरीके से रखी गई हैं।

यह पत्राचार जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी बेटी को विश्व इतिहास और सभ्यता का बुनियादी पाठ पढ़ाने का दस्तावेज़ है, जो बीसवीं सदी के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लिखा गया। मुंशी प्रेमचंद द्वारा अनूदित।

PublisherKafka
LanguageHindi
CopyrightThe source text and calculation are believed to be in the public domain.