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उसने कहा था

उसने कहा था

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

20 min
3,873 words
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सरस्वती (जून 1915) में छपी चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की यह कहानी हिन्दी कथा-साहित्य का पहला आधुनिक क्षण मानी जाती है। अमृतसर के बम्बूकार्ट वालों की गलियों में एक लड़का एक लड़की से बार-बार पूछता है — ‘तेरी कुड़माई हो गई?’ — और ‘धत्’ का उत्तर पाता है। पच्चीस वर्ष बाद फ्रांस की बर्फ़ीली खंदकों में लहनासिंह के सामने वही प्रश्न लौटता है, इस बार एक वचन बनकर। पाँच दृश्यों में कसी यह कहानी प्रेम, वचन और बलिदान को जिस संयम से बाँधती है, वह सौ वर्ष बाद भी अद्वितीय है।

कहानी संग्रहहिंदी साहित्यप्रेम कथायुद्धप्रथम विश्वयुद्धबलिदानपंजाबी जीवनअमृतसरस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्यहिन्दी की अमर कहानियाँ
LanguageHindi
Source
उसने कहा था और अन्य कहानियाँ (राजपाल एण्ड सन्ज़, 2014)

Books by चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

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