Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. कविताएँ
कविताएँ

कविताएँ

सुभद्रा कुमारी चौहान

39 min
7,781 words
hi
Start Reading

देशभक्ति, मातृत्व, बचपन और नारी-अस्मिता को अपनी कविताओं का केन्द्र बनाने वाली सुभद्रा कुमारी चौहान हिन्दी की उन पहली स्त्री-स्वरों में हैं जिनकी पंक्ति "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी" आज भी हर भारतीय के कण्ठ में बसी है। स्वाधीनता-संग्राम में दो बार जेल जाने वाली कवयित्री की रचनाओं में राष्ट्रप्रेम का आह्वान और घर-आँगन की कोमल संवेदना साथ-साथ चलती है। इस संचयन में उनकी पचास कविताएँ संग्रहीत हैं — "मुकुल" और "बिखरे मोती" से लेकर "त्रिधारा" तक की। स्वाधीनता-पूर्व भारत की स्त्री-संवेदना का यह अनमोल दस्तावेज़ अब सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है।

हिन्दी कविताहिन्दी साहित्यदेशभक्ति काव्यमहिला रचनाकारस्वाधीनता संग्रामराष्ट्रीय चेतनाछायावादोत्तर काव्यखड़ी बोलीस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्यबाल-काव्यनारी-संवेदना
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
Hindisamay (MGAHV Wardha)

Similar books

भिखारिनभिखारिन
विदाविदा
पाषाणीपाषाणी
हिंदुत्व का दर्शन
जीवित और मृतजीवित और मृत
पोस्टमास्टरपोस्टमास्टर
काबुलीवालाकाबुलीवाला
अतिथिअतिथि
दृष्टि दानदृष्टि दान
अपरिचिताअपरिचिता
हिंद स्वराजहिंद स्वराज
पत्नी का पत्रपत्नी का पत्र
सीमान्तसीमान्त
गुप्त धनगुप्त धन
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँरवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँ
हिन्दी भाषा की उत्पत्तिहिन्दी भाषा की उत्पत्ति
रांगेय राघव की कहानियाँरांगेय राघव की कहानियाँ

Similar audiobooks

चारुलता (The broken nest)चारुलता (The broken nest)
मादाम बॉवेरीमादाम बॉवेरी
चेखोव की कहानियाँचेखोव की कहानियाँ