
दीवान-ए-ग़ालिब उर्दू के महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की ग़ज़लों का संकलन है, जो अपनी गहराई, भाषा की नज़ाकत और दार्शनिक दृष्टि के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। ग़ालिब की शायरी में प्रेम केवल रूमानी भावना नहीं, बल्कि अस्तित्व, ईश्वर, आत्मचिंतन और जीवन के रहस्यों से जुड़ा एक व्यापक अनुभव बनकर सामने आता है।
उनकी ग़ज़लों में दर्द, विडंबना, सूक्ष्म हास्य और आत्ममंथन का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। ग़ालिब ने पारंपरिक ग़ज़ल की सीमाओं को विस्तार देते हुए उसे विचार और अनुभव की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी शायरी पाठक को बार-बार नए अर्थ खोजने के लिए प्रेरित करती है, यही कारण है कि दीवान-ए-ग़ालिब आज भी उतनी ही प्रासंगिक और लोकप्रिय है।
यह संग्रह उर्दू साहित्य, काव्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए एक अनिवार्य कृति माना जाता है।