
नासिख़
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इमाम बख़्श नासिख़ (1772–1838) लखनवी दबिस्तान-ए-शायरी के बानियों में से एक थे। उन्होंने उर्दू ग़ज़ल की ज़बान को सँवारने और उसे फ़ारसी-ज़दा अल्फ़ाज़ से पाक करने में अहम किरदार अदा किया। इस दीवान में उनकी तमाम ग़ज़लें शामिल हैं जो रेख़्ता पर हिन्दी में उपलब्ध हैं।
LanguageHindi
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