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रांगेय राघव की कहानियाँ

रांगेय राघव की कहानियाँ

रांगेय राघव

3h 37m
43,377 words
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रांगेय राघव हिंदी कहानी के उस स्तंभ का नाम है जिसने 'यथार्थ' को न केवल देखा, बल्कि उसे अपनी लेखनी से जीवंत कर दिया। इस संग्रह में उनकी ९ महत्वपूर्ण कहानियाँ संकलित हैं, जो उनके कथा-शिल्प की विविधता को दर्शाती हैं। 'गदल' जैसी कहानी जहाँ राजस्थानी परिवेश के बीच एक स्त्री के अदम्य साहस और सामाजिक जकड़न को तोड़ते प्रेम की महागाथा है, वहीं 'गूंगे' कहानी समाज की संवेदनहीनता पर एक गहरा प्रहार करती है। राघव का दृष्टिकोण मार्क्सवादी चेतना से प्रभावित होते हुए भी सदैव मानवीय गरिमा और लोक-तत्व से जुड़ा रहा है।

इस संकलन की विशेषता यह है कि इसमें सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक चित्रण (जैसे 'अवसाद का छल') और व्यापक सामाजिक सरोकार (जैसे 'पंच परमेश्वर' और 'प्रवासी') का अद्भुत संगम मिलता है। राघव की भाषा में एक विशेष प्रकार की रवानी और आंचलिकता का प्रभाव है जो पाठक को सीधे परिवेश से जोड़ देता है। १९४० और ५० के दशक की पृष्ठभूमि में लिखी गई ये कहानियाँ आज भी अपने शिल्प और कथ्य की दृष्टि से उतनी ही नवीन और प्रासंगिक जान पड़ती हैं। यह पुस्तक रांगेय राघव के विशाल कृतित्व को संक्षेप में समझने के लिए एक अनिवार्य संकलन है।

कहानी संग्रहहिंदी साहित्यआधुनिक हिंदी कथाप्रगतिशील लेखनसामाजिक यथार्थवाद20वीं सदीस्वतंत्रता संग्रामविभाजन की त्रासदीग्रामीण जीवनशहरी समस्याएंजातिवादगरीबीशोषणमानवीय संवेदनाराष्ट्रीय चेतना
PublisherKafka
LanguageHindi
CopyrightThe source text and calculation are believed to be in the public domain.

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