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कुल्लियात-ए-मीर

कुल्लियात-ए-मीर

मीर तक़ी मीर

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कुल्लियात-ए-मीर अठारहवीं शताब्दी के महान उर्दू शायर मीर तक़ी मीर की संपूर्ण काव्य रचनाओं का संकलन है। इस ग्रंथ में मीर की छह दीवानों की लगभग 13,000 से अधिक शेर और ग़ज़लें संग्रहीत हैं, जो उनकी पूरी काव्य यात्रा को प्रस्तुत करती हैं। मीर ने अपने जीवनकाल में दिल्ली और लखनऊ में रहते हुए इन रचनाओं को लिखा, जो मुग़ल साम्राज्य के पतन और सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर को दर्शाती हैं। उनकी शायरी में प्रेम, विरह, दर्द, आध्यात्मिकता और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत चित्रण मिलता है। मीर की भाषा सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है, जो सीधे पाठक के दिल में उतर जाती है।

कुल्लियात-ए-मीर का उर्दू साहित्य में विशेष महत्व है क्योंकि मीर तक़ी मीर को उर्दू शायरी का खुदा माना जाता है। उनकी रचनाओं में प्रेम और दर्द की जो गहराई और सच्चाई है, वह उन्हें अन्य शायरों से अलग करती है। मीर ने फ़ारसी और हिंदवी परंपराओं को मिलाकर उर्दू ग़ज़ल को एक नई ऊंचाई दी और भावनात्मक अभिव्यक्ति की नई शैली विकसित की। उनकी शायरी में आत्मकथात्मक तत्व भी प्रमुखता से मौजूद हैं, जो उस युग के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को समझने में मदद करते हैं। यह संकलन न केवल साहित्यिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, और उर्दू साहित्य के अध्येताओं और प्रेमियों के लिए एक अनिवार्य ग्रंथ माना जाता है।

उर्दू शायरीक्लासिकल उर्दू साहित्यग़ज़ल18वीं सदीमुग़ल कालरोमांटिक शायरीदिल्ली स्कूलइश्क़िया शायरीफ़ारसी प्रभावसूफ़ियाना तत्वदर्द और विरहशास्त्रीय काव्यदीवानरेख़्ता परंपरा
PublisherAdbi Duniya
LanguageHindi
Source
Adbi Duniya

Audiobooks by मीर तक़ी मीर

ज़िक्र-ए-मीरज़िक्र-ए-मीर

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