
विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में एक ऐसा व्यक्ति है जिसकी हाजिरजवाबी से बड़ी-बड़ी राजनीतिक समस्याएँ सुलझ जाती हैं। तेनाली गाँव का रामलिंगम अपनी सूझ-बूझ और व्यंग्य से दरबारियों की हर चाल को काटता है। यह वह शख्स है जो बचपन में ही दावा करता था कि वह सोते हुए लोगों को भी हँसा सकता है।
इस कथा-संग्रह में राजदरबार की वे घटनाएँ दर्ज हैं जहाँ बुद्धि ही सबसे बड़ा हथियार है: एक ऐसी बिल्ली जो दूध पीने से इंकार कर देती है, राज्य भर के कौवों की गिनती का शाही फरमान, एक लाल मोर का सच, सुब्बा शास्त्री और राजगुरु की रची गई साज़िशें, और एक बेशकीमती फूलदान के टूटने पर मिली मौत की सजा से बचने की तरकीब।
मध्यकालीन दक्षिण भारतीय इतिहास से उपजी ये कथाएँ विजयनगर साम्राज्य के दरबारी जीवन और तत्कालीन न्याय-व्यवस्था का सीधा विवरण प्रस्तुत करती हैं। सदियों से ये किस्से भारतीय लोक-परंपरा और बाल साहित्य के रूप में संरक्षित रहे हैं।