
‘शिकवा’ और ‘जवाब-ए-शिकवा’ अल्लामा मुहम्मद इक़बाल की परस्पर संबद्ध नज़्में हैं—पहली में समुदाय अपनी ऐतिहासिक निष्ठा, विडंबना और पतन को लेकर ईश्वर से प्रश्न करता है; दूसरी उसी प्रश्न का काव्यात्मक उत्तर रचती है। इस पाठ में दोनों नज़्मों की छह-पंक्तियों वाली मूल बंद-संरचना सुरक्षित है। रेख़्ता के जन्मजात डिजिटल यूनिकोड पाठ से देवनागरी और उर्दू, दोनों लिपियाँ ज्यों की त्यों रखी गई हैं; किसी स्कैन, OCR या मशीन-लिप्यंतरण का उपयोग नहीं हुआ।