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वली दकनी

वली दकनी

वली दकनी

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3,698 words
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वली दकनी (1667–1707) को उर्दू ग़ज़ल का बानी और बाबा-ए-रेख़्ता कहा जाता है। औरंगाबाद (दक्कन) के इस शायर ने उर्दू शायरी को वो बुनियाद दी जिस पर आगे चलकर मीर, ग़ालिब और दूसरे शायरों ने इमारत खड़ी की। उनकी ग़ज़लों में हिन्दवी और फ़ारसी का ख़ूबसूरत मिश्रण है, इश्क़ की सादगी और दक्कनी ज़बान का अनोखा रंग है।

दक्षिणी उर्दू शायरीसूफी रहस्यवादरोमांटिक प्रेमगज़ल परंपरादक्कन सल्तनत युग17वीं-18वीं शताब्दीदक्कनी हिंदी-उर्दू साहित्यभक्ति और इश्कगोलकुंडा सांस्कृतिक केंद्रफारसी-भारतीय काव्य संगमआध्यात्मिक प्रेमशास्त्रीय उर्दू के जनकदरबारी शायरी
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
Rekhta

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