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कटोरा भर खून

कटोरा भर खून

देवकीनन्दन खत्री

2h 27m
29,278 words
hi
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रहस्य और रोमांच की एक ऐसी दुनिया में जहाँ जादू-टोना, तंत्र-मंत्र और अलौकिक शक्तियाँ वास्तविकता का हिस्सा हैं, एक कटोरा भर खून किसी साधारण वस्तु से कहीं अधिक महत्व रखता है। यह उन्नीसवीं सदी के अंत की भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में बुनी गई कथा है, जहाँ षड्यंत्र, प्रेम, प्रतिशोध और रहस्यमय घटनाओं का जाल बिछा है। पाठक एक ऐसी यात्रा पर निकलते हैं जहाँ हर मोड़ पर नई पहेलियाँ सामने आती हैं और सच्चाई कई परतों में छिपी होती है।

देवकीनन्दन खत्री की यह रचना तिलिस्मी और ऐय्यारी साहित्य की परंपरा को आगे बढ़ाती है, जहाँ अद्भुत घटनाओं और मानवीय भावनाओं का संगम मिलता है। कथा में ऐसे पात्र हैं जिनके इरादे और पहचान दोनों संदिग्ध हैं, और जिनकी वफादारी लगातार परीक्षा में रहती है। लेखक ने सामाजिक मान्यताओं, अंधविश्वासों और उस दौर की सोच को कहानी में इस तरह पिरोया है कि रहस्य और यथार्थ एक-दूसरे में घुल-मिल जाते हैं। हर अध्याय पाठक को उत्सुकता के नए शिखर पर ले जाता है।

यह किताब उन पाठकों के लिए है जो पारंपरिक भारतीय कथा-शैली के मर्मज्ञ हैं और जिन्हें ऐसी कहानियों में रुचि है जहाँ कल्पना और संस्कृति का अद्भुत मिश्रण हो। हिंदी साहित्य में तिलिस्मी उपन्यासों की लोकप्रियता को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कृति है, जो अपने समय के पाठकों को मंत्रमुग्ध करती थी और आज भी उस युग की साहित्यिक रुचियों की झलक देती है।

तिलिस्मी उपन्यासजासूसी साहित्यरहस्य और रोमांचजादू और तंत्र-मंत्रअय्यारीउन्नीसवीं सदी का भारतदेवकीनन्दन खत्रीहिंदी गद्य का प्रारंभिक कालरोमांचक कथानकषड्यंत्र और साजिशनायक की वीरताकाल्पनिक संसारलोकप्रिय साहित्य
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
Hindi Kavita